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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लखनऊ आगमन: राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल से राष्ट्र को मिला नया संदेश
लखनऊ की धरती एक बार फिर इतिहास की साक्षी बनी, जब देश के प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बाहर उत्तर भारत के
हृदय में स्थित राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के उद्घाटन के लिए पहुँचे।
यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह भारत की चेतना, स्मृति और भविष्य
को जोड़ने वाला क्षण था।
दिशा को भी स्पष्ट करता है।
राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल केवल एक स्मारक नहीं है। यह उन विचारों, मूल्यों और संघर्षों
का संग्राहक है, जिन पर आधुनिक भारत की नींव रखी गई।
यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाने का कार्य करेगा कि
राष्ट्र केवल भूगोल नहीं, बल्कि विचारधारा होता है।
यहाँ भारत के महान सपूतों, विचारकों, समाज सुधारकों और राष्ट्रनिर्माताओं की
प्रेरणाएँ समाहित हैं, जिनसे युवा पीढ़ी आत्मबोध और राष्ट्रबोध दोनों प्राप्त कर सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि
भारत अब अतीत को भूलकर नहीं, बल्कि अतीत से सीखकर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं,
बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्माण करना है।
मुख्य बिंदु जो मोदी जी ने रेखांकित किए:
- राष्ट्र पहले की सोच
- संस्कृति और विकास का संतुलन
- युवाओं में आत्मगौरव
- इतिहास के साथ न्याय
- नई पीढ़ी को सही नायक
मोदी जी ने क्या नहीं कहा – लेकिन संदेश साफ था
प्रधानमंत्री ने किसी दल या व्यक्ति पर सीधा प्रहार नहीं किया,
लेकिन उनका संदेश स्पष्ट था कि तुष्टिकरण की राजनीति
और इतिहास के विकृतिकरण का दौर अब समाप्त हो रहा है।
उन्होंने संकेतों में कहा कि राष्ट्र को कमजोर करने वाली सोच के लिए
नए भारत में कोई स्थान नहीं है।
योगीराज 2025: उत्तर प्रदेश की नई पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब केवल
“बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है।
योगीराज 2025 का अर्थ है:
- कानून व्यवस्था में शून्य सहनशीलता
- धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
- इंफ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विकास
- निवेश और रोजगार
- गांव, गरीब, किसान और युवा केंद्रित नीति
लखनऊ से निकला राष्ट्रीय संदेश
लखनऊ केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी नहीं, बल्कि
भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक है।
राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का उद्घाटन यह दर्शाता है कि अब
संस्कृति और सुशासन को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
आगे का विज़न: 2047 तक का भारत
प्रधानमंत्री मोदी का विज़न केवल चुनाव तक सीमित नहीं है।
उनका लक्ष्य है 2047 तक विकसित भारत।
इस विज़न में:
- आर्थिक आत्मनिर्भरता
- सांस्कृतिक स्वाभिमान
- तकनीकी नेतृत्व
- सामाजिक समरसता
भविष्य की राजनीति और सामाजिक संकेत
यह उद्घाटन आने वाले समय की राजनीति की दिशा भी तय करता है।
विकास + विरासत अब केवल नारा नहीं, बल्कि नीति बन चुकी है।

