अरावली पर्वतमाला: भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला का इतिहास, महत्व और भविष्य
By JSK HARDOI .COM | Geography | Environment | India
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भूमिका: अरावली पर्वतमाला क्यों है विशेष?
अरावली पर्वतमाला (Aravali Parvat Mala) भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है। यह पर्वतमाला उत्तर-पश्चिम भारत में स्थित है और लाखों वर्षों के भूगर्भीय इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है। JSK HARDOI .COM पर प्रस्तुत यह विशेष लेख अरावली पर्वतमाला के इतिहास, भूगोल, पर्यावरणीय महत्व, वर्तमान चुनौतियों और संरक्षण की आवश्यकता पर आधारित है।
अरावली पर्वतमाला का भौगोलिक विस्तार
अरावली पर्वतमाला का विस्तार लगभग 670 किलोमीटर तक है। यह श्रृंखला गुजरात के पाली जिले से शुरू होकर राजस्थान होते हुए हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। दिल्ली का प्रसिद्ध रिज क्षेत्र भी अरावली का ही हिस्सा माना जाता है।
- राज्य: गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली
- लंबाई: लगभग 670 किमी
- उच्चतम शिखर: गुरु शिखर (माउंट आबू)
अरावली पर्वतमाला का भूगर्भीय इतिहास
भूवैज्ञानिकों के अनुसार अरावली पर्वतमाला की आयु लगभग 1500 से 2500 मिलियन वर्ष के बीच मानी जाती है। यह पर्वतमाला हिमालय से भी कहीं अधिक प्राचीन है। जब हिमालय का निर्माण भी नहीं हुआ था, तब अरावली धरती पर मौजूद थी।
समय के साथ प्राकृतिक क्षरण (Erosion) के कारण इसकी ऊँचाई कम होती चली गई, लेकिन इसका भूगर्भीय महत्व आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अरावली पर्वतमाला का पर्यावरणीय महत्व
अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह पर्वतमाला मरुस्थलीकरण (Desertification) को रोकने में एक प्राकृतिक दीवार की तरह कार्य करती है।
1. मरुस्थल को फैलने से रोकना
अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल को पूर्वी भारत की ओर बढ़ने से रोकती है। यदि अरावली न हो, तो राजस्थान का रेगिस्तान हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैल सकता है।
2. जल संरक्षण में भूमिका
अरावली क्षेत्र की चट्टानें वर्षा जल को रोककर भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करती हैं। कई नदियाँ और जलस्रोत अरावली से ही निकलते हैं।
3. जैव विविधता (Biodiversity)
अरावली पर्वतमाला अनेक वन्य जीवों, पक्षियों और दुर्लभ वनस्पतियों का घर है। यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
अरावली पर्वतमाला और मानव सभ्यता
प्राचीन काल से ही अरावली क्षेत्र मानव सभ्यता का केंद्र रहा है। यहाँ से हड़प्पा काल से जुड़े अवशेष भी मिले हैं। अरावली क्षेत्र में तांबा, जस्ता और अन्य खनिज प्राचीन काल से निकाले जाते रहे हैं।
अरावली पर्वतमाला पर वर्तमान संकट
आज अरावली पर्वतमाला गंभीर संकट का सामना कर रही है। अवैध खनन, अंधाधुंध शहरीकरण और जंगलों की कटाई ने इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला को नुकसान पहुँचाया है।
अवैध खनन
राजस्थान और हरियाणा में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है।
शहरीकरण और निर्माण कार्य
दिल्ली-NCR क्षेत्र में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों ने अरावली के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुँचाया है।
सरकारी प्रयास और न्यायालय के निर्देश
अरावली पर्वतमाला की रक्षा के लिए समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। कई क्षेत्रों में खनन पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।
अरावली संरक्षण क्यों जरूरी है?
यदि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में उत्तर भारत को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। जल संकट, प्रदूषण और तापमान वृद्धि इसके प्रत्यक्ष परिणाम होंगे।
JSK HARDOI .COM की विशेष अपील
JSK HARDOI .COM अपने पाठकों से अपील करता है कि पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें। अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की सुरक्षा कवच है।
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